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*••──────•◦﷽◦•──────••*
*اَلصَّلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَیۡكَ يَارَسُوۡلَ اللّٰهِ ﷺ*
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अज़ान की अस्ल वज्अ (ईजाद) तो नमाज़ ही के लिये थी फिर दूसरे मवाकेअ पर भी इस्तिमाल हुई। याद रहे इस्लाम ने कई मवाकेअ पर अज़ान देना मुस्तहूसन (यानी पसन्द फ़रमाया) है उन में से चन्द येह हैं: (1) बच्चे के पैदा होने पर दाएं कान में अज़ान और बाएं में इकामत मनून हुई, (2) जहां जिन्नात का असर हो वहां भी अज़ान दी जाती है, (3) जब सुवारी का जानवर सरकशी करे (4 ) बद मिजाज आदमी या जानवर के कान में, (5 )ग़मज़दा, (6) मिर्गी के मरीज़ और ( 7 )गुस्से वाले शख्स के कान में (8) आतश ज़दगी के वक़्त (9) रास्ता भटक जाने की सूरत में (10) वबा (यानी बीमारी) के ज़माने में ( 11 ) दपने मय्यित के बाद।
( 📚नुहतुल कारी, 2/296, 📚बहारे शरीअत, 1/466, हिस्सा :
3) हज़रते मुफ्ती अहमद यार खान ने अज़ान के मवाकेअ को अरबी शे'र में यूं बयान फ़रमाया है जिस को जुबानी याद कर लेने से अज़ान के येह मवाके याद रखना आसान हो सकता है।
فَرضُ الصَّلوةِ وَ فِي أُذُنِ الصَّغِيرِ وَفِي خَلْفِ الْمُسَافِرِ وَالْغَيْلَانِ إِنْ ظَهَرَتْ وَزِيدَ اربع ذُوهَمَ وَ ذُوغَضَبٍ مُسَافِرٌ ضَلَّ فِي نَفْسٍ وَ مَنْ مَرَعا
وَقْتِ الْحَرِيقِ وَالْحَرْبِ الَّذِي وَقَعَا
فَاحْفَظ لِسِتْ مِنَ الَّذِي قَدْ شَرَعَا
नुहतुल कारी, 2/296, बहारे शरीअत, 1/466, हिस्सा : 3)
फ़र्ज़ नमाज के लिये, बच्चे के कान में, आग लगने के वक्त, सख्त जंग हो, मुसाफ़िर के जाने के बाद, जिन्नात के ज़ाहिर होने पर, गुस्से वाले पर, रास्ता भूल जाने वाले के लिये और मिर्गी वाले के लिये। (
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जाअल हक, स. 252)
अजान की बरकतें
पेज न 10/11
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✨⚠NOTE : - *हमारे अकाबीर उलेमा ए अहले सुन्नत के क़ौल और रिवायत में हवाला अलग हो सकता है इसका हरगिज़ मतलब ये नहीं की कोई रिवायत या कौल गलत है!✨
✨पोस्ट( लिखे हुए तफसील ) में कोई ग़लती या कमी नज़र आये तो एडमिन टीम को जरूर मेसेज( msg ) करें*
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